सलखिया में अंशु देव आर्य एवं साथियों द्वारा विधवा महिला मली भोय के घर पर जबरन कब्जा व जानलेवा हमला, कई घायल, मामला गरमाया

सलखिया में अंशु देव आर्य एवं साथियों द्वारा विधवा महिला मली भोय के घर पर जबरन कब्जा व जानलेवा हमला, कई घायल, मामला गरमाया

महिला मली बाई भोय ने अंशु देव आर्य एवं साथियों के ऊपर लगाए गंभीर आरोप

लैलूंगा/सलखिया, मली बाई भोय के कथन अनुसार 3 जून 2025:
दोपहर 12:00 बजे के आसपास लैलूंगा तहसील के अंतर्गत ग्राम सलखिया में एक शर्मनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। अंशु देव आर्य, जो कि पूर्व में छत्तीसगढ़ आर्य सभा का प्रधान रह चुका है, अपने अन्य साथियों—खगेश्वर भोय, पंकज भोय, राधे पटेल और 10 से 15 अज्ञात लोगों के साथ मिलकर एक विधवा महिला मली भोय के घर में जबरन घुस आया और घर पर कब्जा जमाने की नीयत से मकान को तोड़ने लगा। जब मली भोय ने इसका विरोध किया, तो उन पर तथा उनके परिवार पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें मली भोय का सिर एवं हाथ बुरी तरह घायल हो गया।

मली भोय द्वारा बार-बार यह कहने पर कि “यह मेरा घर है, आप इसे क्यों तोड़ रहे हैं”, अंशु देव एवं उसके साथियों ने जवाब दिया कि इस स्थान पर “सामुदायिक भवन” बनाया जाएगा और धमकी दी कि “अगर कुछ बोला या पुलिस को बुलाया तो अंजाम बुरा होगा।” इसके बाद मारपीट शुरू हो गई।

मारपीट की आवाज सुनकर मली भोय को बचाने बंशीधर भोय, चंद्रशेखर भोय, सुनीता, बिंदु और पान ढाली भोय दौड़कर मौके पर पहुंचे। लेकिन आरोपियों की भीड़ ने उन पर भी लाठी-डंडों से हमला कर दिया। देखते ही देखते यह एक भयावह बलवे का रूप ले बैठा जिसमें दोनों पक्षों को गंभीर चोटें आईं। मली भोय, बंशीधर भोय एवं चंद्रशेखर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमला पूरी तरह से सुनियोजित था और अंशु देव लगातार यह कहते पाए गए कि उनकी “CM मैडम” तक पहुंच है और “तहसीलदार के आदेश पर ही यह तोड़फोड़ हो रही है।” यह बयान लोगों में आक्रोश फैलाने के लिए काफी था, जिससे घटना के बाद पूरे गांव में भय और तनाव का माहौल बन गया है।

वर्षों से यह मकान मली भोय का है,सड़क निर्माण में मकान गया तो उसका मुआवजा भी शासन से प्राप्त हुआ ,जिससे फिर नया मकान बनाए हैं , उनके पास संबंधित जमीन और मकान के दस्तावेज भी मौजूद हैं। इसके बावजूद इस प्रकार का हमला और जबरन कब्जा यह दर्शाता है कि कानून की परवाह किए बिना राजनीतिक संरक्षण में कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए आमजन पर अत्याचार करने से नहीं चूकते।

ग्रामीणों का कहना है कि अंशु देव आर्य पर पहले से ही 5 से 6 आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह वर्तमान में जमानत पर बाहर है। साथ ही, उसके ऊपर करोड़ों रुपये के गबन का भी आरोप है, जिसके चलते उसे छत्तीसगढ़ आर्य सभा से निष्कासित किया गया था।

इस घटना ने प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर यह हमला वाकई में तहसीलदार के आदेश पर हुआ है, तो तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी संदेह जताया जा रहा है। क्या तहसील स्तर के अधिकारी निजी स्वार्थ या राजनीतिक दबाव में आकर ऐसे निर्देश दे रहे हैं? और यदि नहीं, तो क्या अंशु देव झूठे दावे कर प्रशासन को बदनाम कर रहा है?

घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया और घायलों को अस्पताल पहुँचाया। हालांकि अभी तक अंशु देव एवं उसके साथियों की गिरफ्तारी की कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस जघन्य कृत्य की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कठोरतम सजा दी जाए। साथ ही तहसीलदार की भूमिका की भी न्यायिक जांच हो, जिससे स्पष्ट हो सके कि क्या यह कार्रवाई सरकारी आदेश पर की गई थी या फिर किसी व्यक्तिगत मंशा के तहत।

इस मामले ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या आम आदमी, खासकर एक विधवा महिला, आज के समाज में सुरक्षित है? क्या प्रभावशाली लोग और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अपराधी कानून से ऊपर हैं?

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितना संवेदनशीलता दिखाता है। क्या दोषियों को उनके अपराध की सजा मिलेगी या फिर राजनीतिक दबाव और रसूख के चलते यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

स्थानीय सामाजिक संगठनों और महिला समितियों ने घटना की निंदा करते हुए कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रदर्शन की चेतावनी दी है। गांव के लोग भी इस घटना से बेहद आक्रोशित हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष:
यह घटना केवल एक महिला पर हमला नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था और सामाजिक न्याय की नींव पर हमला है। यदि इस मामले में त्वरित एवं कठोर भी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इसका संदेश यही जाएगा कि आमजन की सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती, और शक्तिशाली लोग कानून का खुलेआम मखौल उड़ाते रहेंगे।

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