लैलूंगा में शिक्षा व्यवस्था पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: बरडीह स्कूल में जड़ा ताला, BEO के खिलाफ भड़का जनआक्रोश

लैलूंगा में शिक्षा व्यवस्था पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: बरडीह स्कूल में जड़ा ताला, BEO के खिलाफ भड़का जनआक्रोश!

लैलूंगा/बरडीह। लैलूंगा विकासखण्ड की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। माध्यमिक शाला बरडीह में लंबे समय से चल रही शिक्षक की भारी कमी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ आखिरकार ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। बुधवार को ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से स्कूल परिसर में ताला जड़कर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि बरडीह जैसे बड़े गांव में बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है। वर्षों से पर्याप्त शिक्षक पद रिक्त पड़े हैं, जो इक्का-दुक्का शिक्षक हैं, वे भी नियमित रूप से स्कूल में उपस्थित नहीं रहते। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) लैलूंगा को लिखित एवं मौखिक शिकायत दी गई। लेकिन न तो शिक्षक पदों की पूर्ति की गई और न ही अनुपस्थित शिक्षकों पर कोई कार्रवाई हुई। मजबूरन ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

गांव के वरिष्ठ नागरिकों ने कहा – “अगर प्रशासन और शिक्षा विभाग को हमारी समस्या की सुध नहीं है, तो हम भी अब चुप बैठने वाले नहीं। जब तक स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नियुक्त नहीं किए जाते, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।”

ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अगर शिक्षा विभाग ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया तो आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

विद्यालय में ताला जड़े जाने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। स्कूली बच्चे हाथ में किताबें लिए मायूस खड़े दिखाई दिए। अभिभावक कहते हैं कि “हम अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं ताकि वे पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें, लेकिन यहां तो शिक्षण कार्य नाममात्र का रह गया है।”

ग्रामीण महिलाओं ने भी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और शिक्षा विभाग की लापरवाही पर जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि आज की पीढ़ी शिक्षा से वंचित हो रही है और अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझे हुए हैं।

लैलूंगा ब्लॉक में शिक्षा व्यवस्था को लेकर यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई गांवों में शिक्षकों की कमी और स्कूलों की बदहाली को लेकर विरोध दर्ज कराया गया, मगर विभागीय अधिकारियों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया।

बरडीह गांव के इस तालेबंदी आंदोलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही अब ग्रामीणों को और बर्दाश्त नहीं। ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि “या तो शिक्षक दो, या फिर शिक्षा विभाग खुद स्कूल बंद कर दे।”

कुल मिलाकर, बरडीह की यह आवाज अब पूरे विकासखण्ड की आवाज बन चुकी है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस गंभीर जनआक्रोश को कैसे शांत करता है और क्या वाकई ग्रामीणों को जल्द शिक्षक व्यवस्था का समाधान मिल पाएगा, या यह बवाल और बड़ा रूप लेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest