लैलूंगा में बड़ा बवाल: नवा खाई के दिन भूखों बैठा न्याय का भूखा!

लैलूंगा में बड़ा बवाल: नवा खाई के दिन भूखों बैठा न्याय का भूखा!

तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठे नरेश गुप्ता – सवालों के कटघरे में प्रशासन और सरकार

लैलूंगा।
छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार नवा खाई जब पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जा रहा है, उसी दिन लैलूंगा के नवीन कुंजारा निवासी नरेश गुप्ता पिता मंगलू गुप्ता अपने हक और न्याय के लिए भूखे पेट तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए। यह दृश्य प्रशासनिक तंत्र और शासन व्यवस्था की पोल खोलता हुआ दिखाई दिया। सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक गरीब और पीड़ित परिवार अपनी आवाज उठाने के लिए त्योहारों के दिन भी सड़क पर उतरने मजबूर होंगे?

शिकायत से अनशन तक – लेकिन न्याय अब तक नदारद

नरेश गुप्ता ने पहले अनुविभागीय अधिकारी लैलूंगा को आवेदन देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने दो गंभीर विषयों पर जांच और कार्यवाही की मांग की थी। आवेदन के बाद भी जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उन्होंने चेतावनी दी थी कि कार्यवाही न होने की स्थिति में वे आमरण अनशन करेंगे।

आज, 28 अगस्त 2025 को ठीक दोपहर 3 बजे उन्होंने तहसील कार्यालय लैलूंगा के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। खास बात यह है कि उन्होंने पहले से ही थाना लैलूंगा, राजस्व अधिकारी और यहां तक कि जनपद सीईओ एवं प्रोग्राम ऑफिसर तक को शिकायत की प्रतियां दी थीं। यहां तक कि छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी को भी लिखित में शिकायत भेजी गई थी। बावजूद इसके, आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

त्योहार की खुशी पर पड़ा अन्याय का साया

आज पूरा प्रदेश नवा खाई पर्व मना रहा है। लोग नए अन्न का स्वाद ले रहे हैं, परिवार संग खुशियां मना रहे हैं। वहीं, उसी लैलूंगा की धरती पर एक गरीब परिवार न्याय की उम्मीद में भूखों बैठा है। सवाल यही है कि क्या सरकार और प्रशासन को यह तस्वीर दिखाई नहीं दे रही?

त्योहार की खुशियां उस परिवार के लिए किसी दर्दनाक व्यंग्य से कम नहीं, जिसने शासन-प्रशासन के दरवाजे कई बार खटखटाए लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी।

दोषियों पर कार्रवाई या यूं ही लूट का खेल?

नरेश गुप्ता का आरोप है कि सरकारी पैसे की लूटखसोट कर्मचारियों द्वारा की जा रही है और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। सवाल उठता है कि क्या यह सरकार सिर्फ दिखावे की योजनाओं और कागजों पर चलने वाले विकास तक सीमित है? क्या गरीब परिवारों का खून-पसीने का पैसा ऐसे ही भ्रष्ट कर्मचारियों की जेब भरने में जाएगा?

अगर आज भी सरकार चुप रहती है, तो यह संदेश साफ जाएगा कि छत्तीसगढ़ की सत्ता गरीब की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचारियों की संरक्षक बन चुकी है।

जनता का गुस्सा, प्रशासन की चुप्पी

तहसील कार्यालय के सामने बैठे नरेश गुप्ता का अनशन अब धीरे-धीरे लैलूंगा क्षेत्र की जनता में चर्चा का विषय बन गया है। लोग कह रहे हैं कि जब एक आम आदमी न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक कर आमरण अनशन तक उतर आए, तो यह लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है।

जनता सवाल कर रही है –

क्या गरीब की आवाज सिर्फ कागजों तक सीमित है?

क्या मंत्री तक शिकायत पहुंचने के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासन की नाकामी नहीं?

आखिर कब तक भ्रष्ट कर्मचारी गरीबों का हक खाकर मजे लूटते रहेंगे?

सरकार के सामने अब सीधा सवाल

अब देखना यह होगा कि छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन इस अनशन पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।
क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी?
क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा?
या फिर यह आमरण अनशन भी बाकी मुद्दों की तरह सिर्फ फाइलों और मीडिया की सुर्खियों तक सीमित रह जाएगा?

नरेश गुप्ता का भूखों बैठना सिर्फ उनका व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है, बल्कि यह लैलूंगा और छत्तीसगढ़ की उस पीड़ा का प्रतीक है, जो भ्रष्टाचार और लापरवाही की वजह से हर गरीब परिवार झेल रहा है। त्योहार की खुशियों के बीच भूखा बैठा न्याय का भूखा इंसान सरकार से यही पूछ रहा है –

“क्या गरीब का हक मिलेगा, या यूं ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहेगा?”

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